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Wednesday, 29 June 2011
राहुल गांधी बनाम उत्तर प्रदेश
कांग्रेस राहुल में अपना भविष्य देखती है राहुल आते भी उत्तर प्रदेश से ही इस कारण भी यू.पी चुनाव काग्रेस के युवराज के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ी चुनौती काग्रेंस का खोया हुआ वोट बैंक वापस लाने की है जिसके लिए वह हर संभव प्रयास करते भी दिखे है कभी वह किसी अनुसुचित जाति के घर में रात बिताते है तो कभी किसानो का दर्द सुनने मोटर साईकिल पर बैठकर भट्टा पासौल गांव पहुंच जाते है। राहुल गांधी की टक्कर सीधे तौर पर सपा और सत्ता रुढ बसपा से है। राहुल को पार्टी के कमजोर हो चुके संगठनात्मक ढ़ाचे को भी मजबूत करने की आवश्यकता है। राहुल गांधी को कांग्रेस के परम्परागत वोट बैंक को वापस लाने के कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
यू.पी का आगमी विधानसभा चुनाव कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के भविष्य की राह तह करने में अहम भूमिका निभायेगा साथ ही राहुल गांधी अगर इस चुनाव में सफल होने में कामयाब हो जाते है तो वह उन विरोधियों का मुह बंद कर देगें जो उन्हे अमूल बॉय समझते है।
Wednesday, 8 June 2011
सरकार का दमनचक्र

जिस तरह का बर्ताव रामलीला मैदान में सरकार ने शांति पूर्ण तरीके अनशन पर बठै सत्याग्रहियों के साथ किया है वह सरकार के कायरता का परिचय देता है। सरकार की बर्वता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होनें अनशन में शामिल महिलओं व बच्चो को भी नही बख्शा। संप्रग सरकार कानून व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों का दुरुपयोग करके के देश में जिस प्रकार लोकतांत्रिक विपक्ष व विरोध को दबाने की जो साजिश रची है निन्दनीय है. 4 जून 2011 की आधी रात में सो रहे लोगो ये कल्पना भी नहीं की थी कि यूपीए सरकार इस बेशर्मी व क्रूरता के साथ निर्दोष पुरुषों और महिलाओं के खिलाफ बल प्रयोग करेगी। इससे अधिक बेशर्मी व भयावह बात यह है कि कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने इस कार्यवाई न्यायोचित ठहरा है। पुलिस द्वारा की गई बर्वतापूर्ण कार्रवाई औपनिवेशिक काल के दौरान जलियावाला बाग में जनरल डायर द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारने के आदेश की याद दिलाता है।
जिस प्रकार 1977 के इसी महीने में जे.पी. आन्दोलन को कुचलने का प्रयास किया गया था ठीक उसी प्रकार का काम इस यू.पी.ए सरकार ने किया है। लोकतंत्र में विरोध जताना मौलिक अधिकार है, अपनी गलतियों को छिपाने के लिए बल का प्रयोग करना कायरतापूर्ण कृत है।
रात के सन्नाटे में जिस प्रकार से निह्ते लोगो पर आसु गैस के गोले दागे गये उन पर लाठी चार्ज किया गया मानों वह देश के नागरिक नही अपितु दुश्मन हो। वह लोग जो शांतिपूर्ण ढंग से भारत माता की जय एंव भष्ट्राचार के खिलाफ नारे लगा रहे थे मानो उन्होने कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया था। इन वीर पुलिस वाले की काम की प्रशंसना करनी चाहिए जिस प्रकार इन्होने अपनी वीरता का परिचय बेवस महिलाओ, बच्चो और बुर्जुगो पर लाठी चला कर दिखाया है। व तो हमें ऊपर वाले का शुक्रगुजार होना चाहिए कि वहां कोई बड़ी बगदड़ नही मची क्योकि योग शिविर में भाग लेने आए सत्याग्रही काफी अनुशासित थे।
माननीय सर्वोच्य न्यायालय ने में इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सरकार एवं पुलिस प्रशासन से पूछा है कि आखिर क्यों आधी रात में अनशन कर रहे लोगो को हटाने की आवश्यकता पड़ी साथ ही सोते हुए लोगो पर बल प्रयोग करने की क्या जरुरत थी।
सरकार अपने इस कदम के बाद चारो तरफ से घिरती नज़र आय रही है। भा.ज.पा ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है राजघाट पर भा.ज.पा के तमान बड़े नेता एक दिन के अनशन में शामिल हुए इसके बाद आज वह राष्ट्रपति से मिली। देश के अन्य हिस्से में भी सरकार के इस कदम का जोरदार विरोध हो रहा है।
राम देव जी ने ऐलान किया है कि वह तब तक अनशन पर बैठे गे जब तक सरकार सम्पूर्ण मांगो को मान नहीं लेती है। दूसरी तरफ अन्ना ने भी सरकार के मुश्कीले बढा दी है। अन्ना ने जन्तर मन्तर पर अनशन करने का ऐलान कर दिया है सरकार चारो तरफ से ऐसे घिर गई है कि उसे अब समझ में नही आ रहा है कि इस पर क्या करे।
Tuesday, 10 May 2011
अब क्षमा नहीं अब रण होगा...
लेकिन क्या हमारी सरकार के पास इतनी इच्छा शक्ति है कि वह दाउद,टाईगर मेमन, व मुबई धामाकों मे शामिल देश के गद्दारो के खिलाफ कोई कठोर कदम उठा सके या अब भी हम सिर्फ अमेरिका को संतुष्ट करने में लगे रहेगे।
वहीं दूसरी तरफ अमेरिका हमारे साथ दोहरी नीति अपना रहा है एक ओर तो वह कहता है आंतक के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ दूसरी तरफ वह पाकिस्तान का साथ भी देता है जो कि भारत में आतंकी गतिविधयों के लिए जिम्मेबार है। अमेरिका के दोहरी नीति का आभास इस बात से भी लगता है कि हाल में अमेरिका ने कहा कि भारत में हुए हमले की तुलना अमेरिका पर हुए हमले से नहीं की जा सकती साफ शब्दों में अमेरिका पर हुआ हमला विश्व का सबसे बड़ा हमला और भारत पर हुआ आंतकी हमला कुछ भी नहीं। माफ कीजियेगा ओबामा जी लेकिन जितनी एक अमेरिकी जान की कीमत उससे कही ज्यादा भारतीय जान की कीमत है।
अब समय आ गया है कि भारत भी उन गद्धारो को जो कि भारत में अनगणित लोगों के दर्दनाक मौत के जिम्मेबार है उनकों उनके अजाम तक पहुंचाया जाये बेसक व विश्व के किसी कोने में छुप कर क्यों बैठे हो ताकि फिर कोई भारतीय सरजमीं की ओर बुरी नज़र से न देख सके।
Thursday, 21 April 2011
गैलप का साम्राज्यवादी एवं पक्षपातपूर्ण सर्वे
भारत, जहां पारिवारिक जीवन विश्व के किसी भी देश से उन्नत व खुशहाल स्थिति में है उस देश के नागरिक आर्थिक मामले में बेशक कहीं थोड़े कमजोर जरूर हो सकते हैं लेकिन मानसिक तौर पर अन्य देशों की अपेक्षा कहीं ज्यादा संतुष्ट व प्रसन्न हैं। पश्चिमी देश अपने अत्यंत वैभवशाली जीवन से इतने त्रस्त हो चुके हैं कि अब वे भारतीय जीवन दर्शन व परंपरा को अपनाने लगे हैं।
इसके बावजूद सर्वे द्वारा सिर्फ आर्थिक पक्षों के आधार पर पश्चिमी देशों की जीवन शैली को सर्वोच्च स्थान पर रखना एक पक्षीय एवं पक्षपातपूर्ण निर्णय है।
Tuesday, 8 March 2011
तू नारी नारायणी
कभी ममता की दायणी कभी चण्डी स्वरुप
तू नारी नारायणी तेरे अनगणित है रुप........
तू ही इस जग में जीवन दायणी तू ही त्याग की परिचायका
तू नारी नारायणी तेरे अनगणित है रुप.............
कभी तू ने मां बनकर हम सब का जीवन है तारा तो कभी बहना बनकर पग-पग पर तूने हमको है संभारा
तू नारी नारायणी तेरे अनगणित है रुप...........
कभी मित्र बनकर जीवन के हर क्षण में तूने दिया सहारा
तो कभी जीवन साथी बनकर तू अपना सब कुछ हम पर है न्यौक्षारा
तू नारी नारायणी तेरे अनगणित है रुप............
तेरे बलिदान को कोटी कोटी नमन है
जो न समझे तेरे वैभव को व सबसे बड़ा निर्धन है
तू नारी नारायणी तेरे अनगणित है रुप........
तू जितनी तेजस्वनी होगी उतना ही जग चमकेगा
सही मान्ये में तेरे ही प्रगति से ये सारा गुल महकेगा
तू नारी नारायणी तेरे अनगणित है रुप तू नारी नारायणी तेरे अनगणित है रुप।
Tuesday, 14 December 2010
भ्रष्ट्राचार का 2010
2010 अपनी समाप्ति की ओर है, 2010 भारत के इतिहास में कभी न भुलाये जाने वाले अध्याय के रूप में जुड़ गया है । 2010 का साल एक ओर जंहा भारतवासियों को गौरवान्वित होने का मौका देता है तो वहीं भ्रष्ट्राचार का काला साया हमें शर्मसार होने पर मजबूर भी करता है। देश को जंहा इस साल ने खेलो में नए कीर्तिमान स्थापित करने का मौका दिया तो दूसरी तरफ इंही खेलो के आयोजन में हुए व्यापक भ्रष्ट्राचार ने अंतराष्ट्रिये पटल पर हमारी छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजनेता से लेकर पत्रकार तक सरकार से लेकर विपक्ष तक सभी भ्रष्ट्राचार के दलदल में धंसे नज़र आये।
२ जी स्पेक्ट्रेम घोटाला हो या कर्नाटका का भूमि विवाद हर बार भारत का आम जन अपने को ठगा सा महसूस करने के लिए मजबूर था। आदर्श सोसायटी घोटाले ने भारत के अमर सपूत शहीदों को भी नहीं बक्शा उनके परिजनों को मिलने वाला आशियाना भी भ्रष्ट्राचार के इस दलदल ने नीगल लिया। लोकतंत्र का प्रहरी कह जाने वाला मिडिया भी इन सब से अछूता न रह सका नीरा राडिया प्रकरण से लोगो का विश्वास लोकतंत्र के इस प्रहरी से उठता नज़र आया।
2010 साल है जब न्यायपालिका भी संदेह के घरे में आती है देश सर्वोच्च न्यायलय किसी प्रान्त के उचतम न्यायलय के खिलाफ कठोर टिपणी करता है। भारत में आम जन अपना अंतिम सहारा न्यायलय को ही मानते है लेकिन इस प्रकरण से उनका विश्वास कंही न कंही कमजोर हुआ है ।जिन लोगो पर उत्तर देने की जिम्मेवारी है वही खामोश बठे है। जिसका दामन झाकने की कोशिश करो वहीं दाग नज़र आता है।
जाते जाते 2010 हमे सीख देकर जा रहा है की अब बहुत हो गया बहुत सह लिया अब बस अब फिर किसी धमाके की आवश्कता है क्योंकि बहरो को सुनाने के लिए धमाके की जरुरत होती है। यंहा दुष्यंत के कविता कि व लाइन ठीक प्रतीत होती है की-
हो गई है पीर पर्वत. सी पिघलनी चाहिएए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
विशेषकर युवाओ को आगे आना होगा इस भ्रष्ट्राचार से भारत को मुक्त करना होगा। सरकार अगर इन भ्रष्ट्राचारियो को सजा नहीं सुनाती है तो अब अगले पांच साल का इंतजार नहीं करके इन देशद्रोहियों को उनके अंजाम तक पंहुचाना होगा ताकि आने वाले समय में फिर कोई देश के साथ गद्दारी करने की हिम्मत न कर सके।
Saturday, 13 November 2010
बचपन की आस
मेरा भी मन करता है बारिश में कागज की नाव तेरानो को
ममी पापा के ऊँगली पकड़ कर सुबह सुबह स्कूल जाने को
दादा दादी के संग परियो की कहानी में डूब जाने को
शाम डले दोस्तों के साथ क्रिकेट व पतंग उड़ाने को ।
मेरा भी मन करता है बारिश में कागज की नाव तेरानो को ....2
मेरा मन भी पढने को करता है
पढ़ कर डॉक्टर टीचर इनजिनीर खूब खूब बड़ा बने को करता है
लेकिन सपने सपने तो आकिर सपने होते है
जो सुबह की किरणों के साथ टूट जाते है ।
मेरा भी मन करता है बारिश में कागज की नाव तेरानो को.....2
सुबह कोई आवाज लगाता है छोटू चल टेबल साफ कर दे
तू कोई कहता है छोटू चल गरम गरम चाय बना दे
कंही घर पर एक और जंहा बचपन सोता है
वंही घर के झाडो बर्तन करते करते छोटू तन्हाई मैं रोता है
छोटू छोटू के शब्दों मानो इनका निजी अस्तित्व कंही डूब गया हो
भारत के इस बचपन के सारे सपने टूट गया हो।
मेरा भी मन करता है बारिश में कागज की नाव तेरानो को...2
वह छोटू हमसे कुछ नहीं बस अपना बचपन मांग रहा है
जीवन के बस कुछ क्षण मांग रहा है
अगर हमें भारत को सही में समृद्ध बनाना है
तो भारत के इस बचपन को उसका बचपन लोटाना होगा ।