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Monday, 25 January, 2010

आखिर कब लोटेंगे गुलमर्ग की वादियों में अपने घर कश्मीरी पंडित (२० साल वनवास के )

कश्मीर व कश्मीर की समस्याओं के लिए हमारे देश का कथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग निरंतर प्रयास करता रहता हैं जिसका जीवंत उदहारण कश्मीर को अधिक स्वायता देने की मांग करता हुआ जस्टिस शगीर अहमद की रिपोर्ट हैं । मगर इस प्रकार के बुद्धिजीवी वर्ग के द्वारा कश्मीरी पंडितो के घर वापसी को लेकर न तो किसी प्रकार की मांग उठाई जाती है नहीं कोई संवेदना या प्रतिक्रिया ही सामने आती है । अगर कोई इस प्रकार का प्रयास करता भी है तो उसे सांप्रदायिक कहा जाता है।

भारत जहाँ भगवान् श्री राम को भी 14 वर्ष के वनवास के बाद घर वापसी का स्वभाग्य प्राप्त हो गया था। उसी देश में कश्मीरी पंडितो को अपने घर कश्मीर को छोड़े हुए २० वर्ष बीत गए लेकिन घर वापसी की राह अभी भी अंधकारमय है । लगभग 7 लाख कश्मीरी परिवार भारत के विभिन्न हिस्सों व् रिफूजी कैम्प में शरणार्थियो की तरह जीवन बिताने को मजबूर है। लेकिन इनका दर्द लगता है शासन कर्ताओं को नज़र नहीं आता शायद इसलिए इनके पुनर्वसन के लिए ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है। लेकिन इनकी उदारता तो देखिये अपने ही देश में शरणार्थियो की तरह जीवन व्यतीत करने के बाद भी भारत में इनकी आस्था कंही से कमजोर नहीं हुई है दूसरी तरफ अलगाववादी हैं जिन्हें सरकार के तरफ से हर सुविधांए प्रदान की जाती है फिर भी वह भारत को अपना देश नहीं मानते और कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रचते रहते हैं इसके बाद भी वह कश्मीर में शान के साथ रहते है। कश्मीरी पंडितो को नाराजगी सिर्फ सरकार से नहीं है उनकी आंखे कुछ सवाल हमसे भी पूंछती हैं कि क्या हमें भी उनका दर्द नहीं दिखाई देता ? अगर दिखता है तो हम मौन क्यों हैं, इन सवालो का जवाब अपने अन्दर खोजना होगा की कश्मीरी पंडितो को हमारे सदभावना की नहीं हमारे प्रयासों की आवश्कता है ।

डल झील व गुलमर्ग के फूलो की खूबसूरती बिना कश्मीरी पंडितो के अधूरी है। कश्मीर फिर से सही मान्ये धरती का स्वर्ग तभी बन पाएगा जब कश्मीरी पंडितो की सुरक्षित घर वापसी हो जाएगी और घाटी एक बार फिर कश्मीरी पंडितो के मन्त्र उचारण से गुजने लगेगी........

1 comment:

  1. very nice scrpit mr novneet . i hope aapke es prayar se kuch na kuch pahal jarur hoga.od bless you

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